Sunday, December 10, 2017

कोई तो होगा.......


कोई तो होगा मुझ-सा,
बिल्कुल मेरे जैसा,
मेरे स्वतंत्र खयालों सा,
मन के तम में
उजियालों सा!

समझ सकेगा मेरी
अनकही बातों को,
रोक सकेगा अनचाहे
लुढ़कते आंसुओं को,
उसका तासीर
मेरे जीने के अनुकूल होगा,
उसका खयाल मात्र ही
मेरा सुकून होगा,
कोई तो ऐसा होगा!

अपनी सारी दुविधा आज
कचरे के डब्बे में फेंक आऊंगी,
अपनी मायूसी को भी
जलते चुलहे में झोंक आऊंगी,
बाग से सारी खुशबू
खुद में बटोर लाऊंगी,
कोई जो तितली मिली, उसकी अठखेलियां भी समेट लाऊंगी .....

पंछियों से थोड़ी
चहचहाहट उधार ले लूंगी,
मन मलीन हो गया है,
सूरज की किरणों से
स्नान कर आऊंगी,
चांद को अपने बालों में खोंसकर
चांदनी का लहंगा पहनुंगी,
आईने से गुफ्तगू कर
खुद को खूब संवारूंगी,
हर वो यत्न, जो मुझे उसके
करीब लाये, करूँगी,
उससे मिलवाने की अपील
सारी कायनात से करूँगी...
बहुत हो गया, यूँ
हाथ पे हाथ धरे बैठे रहना,
अपने मीत की तलाश
अब मैं खुद करूँगी ।

(Painting from Google)

2 comments:

  1. प्रेम को पाने की गुजारिश अच्छी लगी. बधाई.

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  2. Thank you so much Mam. I am so so so happy to see your comment. I am a big fan of yours.

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कोई तो होगा....... कोई तो होगा मुझ-सा, बिल्कुल मेरे जैसा, मेरे स्वतंत्र खयालों सा, मन के तम में उजियालों सा! समझ सकेगा मेरी अनकही...